Home कुछ हट के ये है इतिहास की सबसे सुंदर राजकुमारी, अपने प्राण दे दिए लेकिन अकबर को अपना शरीर छूने तक नही दिया

ये है इतिहास की सबसे सुंदर राजकुमारी, अपने प्राण दे दिए लेकिन अकबर को अपना शरीर छूने तक नही दिया

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नई दिल्ली : हिन्दुस्तान के इतिहास में प्रेम कहानियों की संख्या बहुत अधिक है। जो कहानी आज आप पढ़ने जा रहे हैं ये एक ऐसी रानी की कहानी है जिसकी खूबसूरती पर दिल्ली का बादशाह अकबर भी फिदा हो गया था लेकिन सबकुछ एक चुटकी में हासिल करने करने वाले बादशाह इन्हें हासिल नहीं कर पाए। बाज बहादुर मध्य प्रदेश के मांडू के राजा थे। राजा को एक साधारण सी लड़की से प्यार था। जिसका नाम रूपमती था। रूपमती देखने में जितनी खूबसूरत थी उतना ही खूबसूरत उसका गला भी था। दोनों का धर्म भी अलग था और माली हैसियत भी।

जहां एक ओर बाज बहादुर एक शाही घराने से थे, वहीं दूसरी तरफ रूपमती किसान की बेटी। इसके बावजूद बाज बहादुर ने किसी की परवाह किए बिना रूपमती को अपनी रानी बनाया। ये बात उस समय की है जब दिल्ली में अकबर का राज था। रानी रूपमती की सुंदरता की खबर धीरे-धीरे अकबर के कानों तक भी पहुंची तो उससे रहा नहीं गया। उसने बाज बहादुर को एक पत्र लिखा कि उसे बाज बहादुर की हिन्दू रानी के बारे में पता चला है जो काफी सुंदर होने के साथ ही बहुत अच्छा गाना गाती है। अकबर ने कहा कि ऐसी रानी तो दिल्ली के दरबार में होनी चाहिए। इसलिए बेहतर होगा कि बाज बहादुर रानी रूपमती को दिल्ली भेज दें। ये पत्र पाकर बाज बहादुर आग बबूला हो गया। उसने अकबर को जवाबी पत्र लिखा कि उसे अकबर की सोच पर तरस आता है।

अच्छा होगा कि वो अपनी रानियों को भी मांडू भेज दे। अकबर उस समय का ताकतवर मुगल शासक था। उसके लिए बाज बहादुर की ये पत्र किसी अपमान से कम नहीं थी। उसने बाज बहादुर की इस गुस्ताखी का जवाब देने के लिए अपनी सेना मांडू भेज दी। बाज बहादुर ने अपनी छोटी सी सेना के बल पर अकबर की सेना का सामना किया मगर आखिरकार बाज बहादुर की सेना को घुटने टेकने पड़े। अकबर की सेना ने बाज बहादुर को बंधक बना लिया। अकबर ने अपनी सेना को आदेश दिया कि वो मांडू के किले में जाकर रानी रूपमती को लेकर आए। रानी रूपमती को जैसे ही इस बात का पता चला वो बेचैन हो गई। रूपमती ने सोचा कि अकबर की सेना के हाथ लगने से न सिर्फ उसका बल्कि राजा बाज बहादुर का भी अपमान होगा।

रानी ने अकबर के महल में जाने के बजाय जान देने का फैसला किया। रानी के पास एक हीरा था। उन्होंने उस हीरे को मुंह में डालकर निगल लिया और कुछ ही समय में उनकी जान चली हो गई। रानी की जान जाने का समाचार पाकर अकबर दुखी हो गया। उसे काफी पछतावा हुआ। उसने अपने पाप कम करने के लिए बाज बहादुर को कैद से रिहा करने का हुकुम दिया। रिहाई के बाद बाज बहादुर मांडू की राजधानी सारंगपुर पहुंचे। सारंगपुर में ही रानी की मजार थी। बाज बहादुर के लिए अब ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसके लिए वो जीना चाहते थे। वो अकबर से ज्यादा खुद को रानी की जान जाने का जिम्मेदार मान रहे थे। रानी की जुदाई में उन्होंने भी उसी मजार के सामने और सिर पटक-पटक कर अपनी जान दे दी।

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